व्रत रह घर आंगन में महिलाओं ने की हरछठ पूजन संतान प्राप्ति व पुत्र दीर्घायु निमित्त की आराधना publicpravakta.com

 


व्रत रह घर आंगन में महिलाओं ने की हरछठ पूजन 


संतान प्राप्ति व पुत्र दीर्घायु निमित्त की आराधना


 श्रवण उपाध्याय


 अमरकंटक : - मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में आज मंगलवार ०५-०९-२०२३ को महिलाओं ने हलषष्ठी का व्रत रख विधि विधान से कि पूजन-आराधना ।

हरछठ का व्रत महिलाओ द्वारा किया जाता है । महिलाएं अपने परिवार की सुख संवृद्धि , संतान की दीर्घायु व संतान प्राप्ति हेतु षष्ठी माता का व्रत रह कर पूजन करती है । 

यह पूजन भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है । आज ही के दिन कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था , जो यह जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और यह दिवस (व्रत) उन्ही को समर्पित भी करती है । महिलाए घर के आंगन में एक चौकी य पीढ़ा रख उसपे गौरी , गणेश , कलश ( दीपक) रख वन्ही पर छूला , कांस , बैर की डाली खड़ा कर नारियल , पुष्प , सिंदूर ,  चंदन , अगरबत्ती , कपड़ा , सात प्रकार का अनाज , धान की लाई , बांस की छोटी टोकरी , मिट्टी से बना छोटा पात्र (डुबुलिया) , भैंस का दूध , दही , घी , महुआ आदि वस्तु पूजन में रख आराधना करतीं है । महिलाओं ने बतलाया की अपनी श्रद्धानुसार वस्तु रख कर पंडित से पूजन , व्रत की कथा सुनने के बाद आरती की जाती है , महिलाए आज कोई भी अनाज का सेवन नहीं करती । आज व्रती महिलाए भैंस के दूध की दही और पका हुआ महुआ का ही प्रसाद पाती है । 

इस दिन किसान अपने हल की पूजन भी करते है । भगवान बलराम का प्रधान शस्त्र हल है इसी से वे हलधर कहलाते है और यह व्रत हलषष्ठी कहलाता है । इसे देश के अलग अलग जगहों पर अलग अलग नाम से अलग अलग प्रकार से पूजन पद्धति व विधान है । 

पंडित मुकेश पाठक , पंडित संदीप ज्योत्सी ने बताया की यह व्रत विवाहित , नवविवाहिता महिलाए करती है जो अपने परिवार की सुख संब्रद्धि , पुत्र की प्राप्ति , पुत्र की लंबी आयु की कामना लिए दिन भर उपवास रहती है व विधि विधान से पूजन कर मनोकामना षष्ठी माता से मांगती है । पसही का चावल , भैंस के दूध की दही , उबला हुआ महुआ आदि व्रत समाप्ति बाद ग्रहण करती है ।

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