एक ही झिरिया का पानी पीते है इंसान और जानवर, नल - जल का नल बना दिखावा ? मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन जीने को मजबूर है ग्रामीण publicpravakta.com


एक ही झिरिया का पानी पीते है  इंसान और जानवर, नल - जल का नल बना दिखावा ?

 

मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन जीने को मजबूर है ग्रामीण



अनूपपुर/पुष्पराजगढ़ :- नर्मदा नदी के किनारे बसा पुष्पराजगढ़ विकासखण्‍ड का ग्राम पंचायत बीजापुरी नंबर 1 जिसकी आबादी लगभग 300 और मतदाता लगभग 150 है। यहां के ग्रामीण आज भी आदि काल में अपना जीवन यापन बसर करने को मजबूर हो  रहें है । मूलभूत सुविधाओं के लिए बाटजोहते ग्रामीणों के चलने के लायक सड़क तक नसीब नहीं है। आंगनवाड़ी दूर होने के चलते बच्चे आंगनवाड़ी तक नहीं पहुच पा रहे है  जो  क्षेत्र के विकास की तस्वीरे सामने आ रही है वह वोट लेने वाले नेताओं के सारे दावो की पोल खोलती हैं। पिछले 4 पंचवर्षीय यानी 20 वर्ष में दोनो ही मुख्य दलों के प्रतिनिधिओ ने 10 - 10 वर्ष तक यानी 2 -2  पंचवर्षीय में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है वावजूद इसके क्षेत्र में बिजली, पानी, सड़क, आंगनबाड़ी, शुद्ध पेय जल के लिए भी ग्रामीणों को संघर्ष करना पड़ रहा है ?



जिले के पुष्पराजगढ़ विकासखण्‍ड का ग्राम पंचायत बीजापुरी नंबर 1 के संगम टोला का जहां की कुल अबादी 300 और मतदाता 150 के लगभग हैं। जहां गांव पहुंचे के लिए सड़क तक न‍हीं हैं, जाने के लिए पगडण्डी रास्तों से होकर खाई व नदी को पार करते हुए खड़ी चढ़ाई चढ़ कर गांव के लोग आवागमन करते हैं। आंगनवाड़ी दूर होने के चलते बच्चे आंगनवाड़ी नहीं जा पाते। यहां तक गांव में 8वीं के बाद की पढ़ाई के लिए रास्ता ही आड़े आ रहा हैं। ऐसे में बच्चों की आगे की पढ़ाई को विश्राम देना पड़ रहा हैं। गांव में नल तो लगा दिया गया, लेकिन वह भी दिखावा मात्र हैं। झिरिया का गंदा पानी या नर्मदा नदी का पानी ग्रामीण और जानवर एक ही स्‍थान पर अपनी प्यास बुझाने को विवस हैं। बारिश के दिनों में नदी-नाले और बाढ़ की चपेट में आने से पीने के पानी की समस्या विकराल रूप ले लेती हैं।


वहीं जल निगम के प्रभारी से जब पानी सप्लाई न मिल पाने की बात पूछी गई तो उन्होंने कहां कुछ घर ऐसे है।  जहां पानी नही पहुँच रहा हैं। टीम भेज कर चेक करवा लेते हैं, आखिर क्यों पानी नही जा रहा हैं।


जनपद पुष्पराजगढ़ के सीईओ केके सोनी ने कहां कि गाँव का जल्द निरीक्षण कर प्लान बना कर सुविधा देने की बात जरूर कहीं किन्‍तु सब बेमानी हैं। यह रट रटाया जबाब अधिकारियों को होता हैं।

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