ज्योतिषाचार्य पंडित अखिलेश त्रिपाठी ने दी हरछठ की सम्पूर्ण जानकारी एवं मुहूर्त
अनूपपुर :- हिंदू धर्म में हरछठ छठ का खासा महत्व है। यह भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्टी तिथि पर मनाई जाती है। इसे हलषष्ट, हलछठ, ललही छठ के नाम से जाना जाता है। इस दिन बलराम जयंती भी मनाई जाती है। मान्यता है कि इस तिथि के समय भगवान कन्हैया के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। इस कारण इस दिन भगवान बलराम की पूजा का विधान है। हरछठ और राधण छठ व्रत करने से संतान की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली आती है।
*कब है हरछठ व्रत?*
दज्योतिषचार्य पंडित अखिलेश त्रिपाठी बताते है की पंचांग की मानें तो भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्टी तिथि 14 अगस्त को सुबह 04.23 बजे आरंभ होगी, जो 14-15 अगस्त की रात 02.08 बजे समाप्त हो जाएगी। हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस साल हरछठ 14 अगस्त को मनाया जा रहा है। हरछठ व्रत भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी के पहले रखा जाता है।
महिलाओं के लिए क्यों है हलछठ व्रत खास?
हरछठ का पर्व महिलाओं के लिए बेहद खास है क्योंकि इस दिन वे संतान के खुशहाली की कामना करती है। साथ ही यह व्रत संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सुरक्षा के लिए रखा जाता है। यह पर्व श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम को समर्पित है, उन्हें हलधर भी कहा जाता है क्योंकि उनका मुख्य हथियार हल है।
हरछठ व्रत पूजा मुहूर्त 2025
ब्रह्म मुहूर्त- प्रात: 04.23 बजे से 05.07 बजे तक
अमृत काल का मुहूर्त- सुबह 06.50 बजे से 08.20 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11.59 बजे से दोपहर 12.52 बजे तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 02.37 बजे से 03.30 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 07.01 बजे से 07.23 बजे तक
हरछठ व्रत के नियम
हरछठ के दिन व्रती महिलाओं को हल से जुती हुई धरती पर नहीं चलना चाहिए और न हीं हल से तैयार की गई अन्न को खाना चाहिए। इस दिन साग-सब्जी के अलावा गाय के दूध और दही का भी सेवन करने पर मनाही है।
हरछठ व्रत विधि: इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। सूर्यदेव को जल अर्पित करें। अब एक चौकी में भगवान कृष्ण व भगवान बलराम की प्रतिमा स्थापित करें। बलराम जी का शस्त्र हल है, ऐसे में उनकी प्रतिमा के पास हल रखकर पूजा करें। अब भगवान चंदन लगाएं और फूल, माला अर्पित करें। अब आरती उतारें। अब भगवान को फल, मिठाई का भोग लगाएं।
*हरछठ व्रत नियम: हिंदू धर्म की* मान्यताओं के अनुसार, हरछठ व्रत के दिन व्रती महिलाओं को हल से जुती हुई धरती पर नहीं चलना चाहिए और न ही हल से जुते हुए अन्न को नहीं खाना चाहिए। इस दिन साग-सब्जी के अलावा गाय के दूध व दही का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

